शून्य धर्म की आंधी, पड़ेगी सब धर्मो पर भारी ?

शून्य धर्म की आंधी ! सब धर्मो पर पड़ेगी भारी ?
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जी,हां,
सभी धर्म ये ही तो कहते है कि जब इंसान धर्मिक माला जपते-जपते,अपने आराधयो की पूजा,सेवा,ध्यान करते करते,शून्य की स्थिति में पहुँचता है ? तो जन्म-मरण से मुक्ति और मोक्ष सम्भव है !
लेकिन जिस अध्यात्म की शुरुवात ही शून्य अवस्था से हो ?तो प्रारम्भ से कथित मुक्ति /मोक्ष का द्वार खुलना स्वाभाविक है !
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ऐसे ही शून्य धर्म समर्थको का उभरता जनसमूह है सन्त धर्मपाल का ! जो धर्म विहीन,जाति विहीन,आदिकाल की परम्पराओ विहीन व्यवस्थाओं का समर्थन करता है !
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विशाल जनसमूह एवम समर्थको की संख्या एवम उनके अनुयायियो का सेवाभाव देखकर ऐसा लगता है कि आने वाले निकट भविष्य में सभी धर्मों के कथित ठग ,धर्म के ठेकेदारों की छुट्टी होने वाली है !
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आज दिनाक 23/03/19 को उनके अनुन्यायिओ का एक सम्मेलन त्रिवेणी भवन,व्यापार विहार बिलासपुर में है !
उक्त आयोजन में इनके समर्थको की सेवा भाव,इनके सन्त रामपाल के आदर्शो की शिक्षा,अनुशरण को देखते हुए, यह कहा जा सकता है कि आने वाले समय इसी शून्य धर्म का पलड़ा, सब धर्मो पर भारी पड़ने वाला है !
इस आयोजन में इनके अनुयायियो का व्यवहार की सूखी अनुभूति पाकर, जाने वाले को दरवाजे पर ही अहंकार विहीन कर देती है , बच्चा क्या,वृद्ध क्या,पुरुष-महिला, सब हाथ जोड़-जोड़कर आगुन्तको को शिरोधार्य करते पाये गये है ! जबकि अन्य सभी धर्मों में अहंकार,धन,धनकुबेरों की उपस्थिति, धन के बल पर धार्मिक स्थलों की चका-चोंध, सुंदरता को, अच्छा या बुरा धार्मिक स्थल का पैमाना माना जाता रहा है !
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राजनीतिक दलों को रोजी पर भी कार्यकर्ता नही मिलते है !
लेकिन इस आयोजन में गरीब,सामान्य लोग भी दूर-दूर से,अपने खर्चे पर, आकर शामिल हुए है !
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उनके इस आयोजन की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इनके अनुयायी स्वतः समर्पित सेवा-भाव से न केवल लिप्त थे, बल्कि आगुन्तक को देखकर आत्म-मुगध थे !
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कौन है ये लोग?जो इतने कम समय में इतनी भारी संख्या में इस अदृश्य से, नाम विहीन धर्म के /विचारधारा के समर्थक /अनुयायी बने !
इस आयोजन को देखकर, आज का हमारा आंकलन यह कहता है कि इसमें सभी जाति,धर्मो,समुदायों के वो लोग है जो अपने-अपने धर्मो के कथित ठेकेदारों से,धार्मिक ठगों से असन्तुष्ट थे ? जो अपने धर्म के धर्म गुरुओं से,धर्म ठेकेदारों से धर्म के नाम पर गुमराह किये गए , धर्म के नाम पर ठगे गये सदियों से, ये सभी लोग, सन्त रामपाल जी के अनुयायी बने है !
इस आयोजन में आये लोगो से बात करने पर पता चला कि आज तक विभिन्न अलग-अलग समुदायों,जातियॉ के धर्म, उनकी कसौटी पर खरे नही उतरे !
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अभी तक देश में धर्म का मतलब, एक दूसरे धर्म की,रीति-रिवाजों की आलोचना करते हुए,नफरत के सिवाय कुछ नही दे पाए सभी प्रचलित धर्म !
वो विरासत भी दुलर्भ दृश्य हो चले है अब जब विभिन्न धर्मों के स्थापित गुरुओं की सामूहिक चर्चा,मिलन, एक दूसरे का सामाजिक सत्कार किया करते थे ?
सभी धर्मों,जातियो का स्तर इतना गिर गया कि सब अपने धर्म को सरवोपरि बताने,साबित करने में किसी भी हद तक जाने लगे लोग !
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इन तमाम उलझनों में जो वास्तविक शांतिप्रिय लोगो का समूह था वो काफी समय से यह महसूस कर रहा था कि उन्हें कोई ऐसा पथ-प्रदर्शक मिले ?जो सभी धर्मों में व्याप्त बुराइयों की अपेक्षा, सरल सिद्धान्तों पर कम से कम बन्धनों वाला मार्ग बताये !
बस इंतजार था तो राह भी मिली जनता को, और एक नए पथ-प्रदर्शक सन्त रामपाल जी के सानिध्य में लोगो को जो मार्गदर्शन प्राप्त हुआ ? तो देर किस बात की ?कुछ ही समय में विशाल जनसमूह उमड़ पड़ा उनको सर-आँखों पर बैठाने को?
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लोगो को समझ आ गया कि वास्तविक धर्म शून्य है !
जो जाति विहीन हो,धर्म विहीन हो, समुदायों की भिन्नता विहीन हो ? अन्य सभी धर्म कहते आये है कि शून्य की अवस्था में पहुचने पर ही मोक्ष सम्भव है ! तो सन्त रामपाल जी ने शुरुवात ही शून्य की कर्मशाला से की है !
मोक्ष की शुरुवात से ही शून्य की शुरुवात की है !
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आपकी स्वस्थ आलोचना एवम सुझाव सादर आमंत्रित है!
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आयोजन का अनुभव है ये !
किसी धर्म की आलोचना या बुरा कहने का प्रयास नही !
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विकृति विहीन धर्म का उदय महसूस किया हमने आज,सन्त रामपाल के बिलासपुर आयोजन में, लोगो से की गयी बाते,और लोगो का अनुभव ही इस लेख का आधार है !

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